Friday, 23 February 2018

आँख की किरकिरी हिंदी पुस्तक (Aankh Ki Kirkiri Book In Hindi) | Hindi Books In Pdf





आँख की किरकिरी
(Aankh Ki Kirkiri)

पुस्तक के लेखक (Author of Book) : रवीन्द्रनाथ टैगोर (Ravindranath Tagore)
पुस्तक की भाषा (Language of Book) : हिंदी (Hindi)
पुस्तक का आकर (Size of Ebook) : 19.8 MB
कुल पन्ने (Total pages in ebook) : 289







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Book Details :

Following the precaution of my literary trail, it will be immediately caught and captured that the novel 'novel' is casual, not only in me but also in the fields of literature of that day. What was the signal from the outset, in my mind, this question is obsolete. The most comfortable answer is that the serial long story demand magazine was always hungry and for the sake of that hunger, the 'Vangdarshan' magazine had entered my name. I did not have any favorable support in it, and it was quite possible that it was a good idea to have a reclaimed inheritance. But, in my mind, I have not been able to win conclusions wherever there is any conflicts, and now even then it happened.

(मेरे साहित्यिक निशान की सावधानी के बाद, इसे तुरंत पकड़ा जाएगा और कब्जा कर लिया जाएगा कि इस उपन्यास "उपन्यास" आकस्मिक है न केवल, बल्कि उस दिन के साहित्य के क्षेत्र में भी। शुरुआत से संकेत क्या था, मेरे मन में, यह सवाल अप्रचलित है। सबसे आरामदायक जवाब यह है कि धारावाहिक लंबी कहानी मांग पत्रिका हमेशा भूखा रही और उस भूख की खातिर, 'वांगदर्शन' पत्रिका ने मेरा नाम दर्ज किया था। मेरे पास इसमें कोई अनुकूल समर्थन नहीं था, और यह काफी संभव था कि पुन: प्राप्त होने वाले विरासत के लिए यह एक अच्छा विचार था। लेकिन, मेरे दिमाग में, जहां तक ​​कोई संघर्ष होता है, मैं निष्कर्ष जीतने में सक्षम नहीं था, और अब भी तब हुआ, ऐसा हुआ।)



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वक्त बदल सकता है, तकदीर खिल जाती है... जब कोई हाथों की लकीरों को पसीने से धोया करता है. . .〽

हार या असफलता के भय को दिल में पालकर जीने से अच्छा हैं कि हम अपने लक्ष्य के लिए नित नए प्रयास अनवरत करते रहे . . . 〽

अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे . . . 〽

नदी की धार के विपरीत जाकर देखिये, हिम्मत को हर मुश्किल में आज़मा कर देखिये, आँधियाँ खुद मोड़ लेंगी अपना रास्ता . . . 〽

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