Saturday, 10 March 2018

आंखन देखी हिंदी पुस्तक (Aankhan Dekhi Book In Hindi) | Hindi Books In Pdf


आंखन देखी
(Aankhan Dekhi)


पुस्तक के लेखक (Author of Book) : दुर्गाप्रसाद अग्रवाल (Durgaprasad Agrawal)
पुस्तक की भाषा (Language of Book) : हिंदी (Hindi)
पुस्तक का आकर (Size of Ebook) : 6 MB
कुल पन्ने (Total pages in ebook) : 128






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Book Details :

This masterpiece of well known litterateur Dr. Durgprasad Agrawal is "not visible" but is just a travelogue. Although in this book, Dr. Agrawal has categorized various experiences of his visit to America, but for many reasons, it has become a unique literary work.

(प्रसिद्ध साहित्यिक डॉ। दुर्गप्रसाद अग्रवाल की यह उत्कृष्ट रचना "दिखाई नहीं दे रही है" लेकिन यह सिर्फ एक यात्रा है। हालांकि इस पुस्तक में, डॉ अग्रवाल ने अमेरिका की अपनी यात्रा के विभिन्न अनुभवों को वर्गीकृत किया है, लेकिन कई कारणों से, यह एक अनोखा साहित्यिक काम बन गया है।)


Best Thoughts : For More Thoughts Go To > Rclipse Thoughts

वक्त बदल सकता है, तकदीर खिल जाती है... जब कोई हाथों की लकीरों को पसीने से धोया करता है. . .〽

हार या असफलता के भय को दिल में पालकर जीने से अच्छा हैं कि हम अपने लक्ष्य के लिए नित नए प्रयास अनवरत करते रहे . . . 〽

अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो कि व्यर्थ के लिए समय ही न बचे . . . 〽

मुश्किलो मे भाग जाना आसान, हर पहलु जिदंगी का इम्तहान होता है. डरने वालो को कुछ मिलता नहीँ जिदंगी मे , लङने वालो के कदमोँ मे जहॉन होता है. . . 〽

सपने ओर लक्ष्य में एक ही अंतर हे.....सपने के लिए बिना मेहनत की नींद चाहिए, ओर लक्ष्य के लिए बिना नींद की मेहनत...〽

हार या असफलता के भय को दिल में पालकर जीने से अच्छा हैं कि हम अपने लक्ष्य के लिए नित नए प्रयास अनवरत करते रहे . . . 〽

नदी की धार के विपरीत जाकर देखिये, हिम्मत को हर मुश्किल में आज़मा कर देखिये, आँधियाँ खुद मोड़ लेंगी अपना रास्ता . . . 〽

ज़िन्दगी दर्द कभी नहीं देती, दर्द तो बुरे कर्म देते है. . . ☝जिन्दगी सिर्फ रंग मंच है, कैसे खेलना है ये हमपे निर्भर करता है. . . 〽

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